रोग पुराण

रोग पुराण
 

ये सूखे बदन और ये बीमार बचपन
जवाँ है अपाहिज बुढ़ापा अजीरन
ये भारत की जनता, ये जनता का जीवन
है कैसा ये जीवन जरा ये बताओ


ये बच्चे नहीं जिनको रोटी मयस्सर
ये महिलाएं भूखी रहें जो उमर-भर
जो मजदूर मेहनत करें भूखे रहकर
ये बीमार क्यों न पड़ें ये बताओ

ये नाली में बहती हुई जो लहर है
ये पानी नहीं, इसको पीना ज़हर है
मगर इसपे जीता यहां हर बशर है
ये पीकर जिएं कैसे हमको बताओ

ये कीचड़, ये दलदल, ये घूरे, ये नाले
ये इंसां को जिंदा निगल जाने वाले
ये घर ऐसे हैं जैसे मकड़ी के जाले
जिएं इनमें कैसे ये हमको बताओ 
 

यहां साँस लेने को तरसे है बचपन
यहां जिंदा कहने को तरसे है बचपन
यहां एक टीके को तरसे है बचपन
है बचपन ये कैसा हमें ये बताओ

जो रोगों को नारों से चाहें भगाना
उन्हें जाके ये राज कोई बताना
कि पहले गरीबी पड़ेगी हटाना
उठो जाके ये बात उनको बताओ

बराबर का उपचार सबको दिलाना
दवाओं को जनता की खिदमत में लाना
गरीबों के नज़दीक विज्ञान जाना
उठो जाके ये बात उनको बताओ

~डी. टी. एफ. के लिए निर्मित 'रोग पुराण' नामक डोक्यूमेंट्री फिल्म के लिए लिखा गया एक गीत